
रीवा। नशे के खिलाफ सख्त अभियान चलाने के बड़े-बड़े दावे करने वाली पुलिस अब खुद सवालों के घेरे में नजर आ रही है। मंचों से नशे के कारोबारियों को सलाखों के पीछे भेजने की बातें करने वाली पुलिस की जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। ताजा मामला रीवा जिले के सोहागी थाना क्षेत्र का है जहां अफीम की अवैध खेती को लेकर एक सनसनीखेज खुलासा सामने आया है और इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अफीम की खेती किए जाने की जानकारी एक मुखबिर द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचाई गई थी। बताया जाता है कि सूचना मिलने के बाद पुलिस हरकत में आई और मौके पर कार्रवाई के लिए टीम भेजी गई। लेकिन जब पुलिस खेत तक पहुंची तो वहां का नजारा देखकर सभी हैरान रह गए। जिस खेत में अफीम की लहलहाती फसल होने की सूचना दी गई थी वहां पुलिस को केवल साफ-सुथरा मैदान मिला।
बताया जा रहा है कि पुलिस के पहुंचने से पहले ही कथित तौर पर अफीम के पौधे उखाड़कर पूरी तरह से हटा दिए गए थे। अब सवाल यह उठता है कि आखिर पुलिस की कार्रवाई से पहले ही खेती करने वालों को इसकी खबर कैसे लग गई? क्या कार्रवाई की जानकारी पहले ही कहीं से लीक हो गई थी? या फिर पूरे सिस्टम के अंदर ही कोई ऐसा कड़ी है जो अवैध कारोबारियों को पहले से सचेत कर देता है।
स्थानीय लोगों के बीच इस घटना को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। लोगों का कहना है कि यदि पुलिस समय पर और गोपनीय तरीके से कार्रवाई करती तो अफीम की अवैध खेती करने वाले लोग आज जेल की सलाखों के पीछे होते। लेकिन खेत का इस तरह अचानक साफ मिलना कई संदेहों को जन्म दे रहा है।
यह भी चर्चा है कि जिस खेत में अफीम की खेती हो रही थी वहां लंबे समय से इस अवैध कारोबार की जानकारी इलाके में फैली हुई थी। इसके बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं होना भी अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। आखिर इतनी बड़ी खेती बिना किसी की नजर में आए कैसे चलती रही?
गौरतलब है कि रीवा जिले में नशे के खिलाफ पुलिस लगातार अभियान चलाने का दावा करती रही है। रीवा रेंज के आईजी भी कई बार मंचों से साफ कह चुके हैं कि नशे के कारोबारियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। लेकिन सोहागी क्षेत्र में सामने आया यह मामला पुलिस के दावों और वास्तविकता के बीच की दूरी को उजागर कर रहा है।
अब लोगों के बीच यह सवाल भी उठने लगा है कि यदि आईजी स्तर से सख्त निर्देश दिए जा रहे हैं तो क्या जिला स्तर पर कहीं न कहीं लापरवाही हो रही है? या फिर कार्रवाई की जानकारी पहले ही बाहर पहुंच रही है जिससे अवैध कारोबार करने वाले लोग पुलिस के आने से पहले ही सबूत मिटाने में कामयाब हो जाते हैं।
इस पूरे घटनाक्रम ने रीवा पुलिस की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा कर दिया है। अगर वास्तव में अफीम की खेती की सूचना सही थी तो यह सिर्फ एक खेत का मामला नहीं बल्कि एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा करता है। अब देखना यह होगा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होती है या नहीं और यदि सूचना लीक होने की बात सामने आती है तो जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई होती है।
फिलहाल सोहागी थाना क्षेत्र का यह मामला जिले में चर्चा का विषय बन गया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि क्या पुलिस इस पूरे रहस्य से पर्दा उठाएगी या फिर अफीम का यह गायब खेत कई सवालों को हमेशा के लिए अनुत्तरित छोड़ देगा।





