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रीवा में KCC कंपनी की मनमानी! बंद बीहर नदी पुल से दौड़ रहे भारी वाहन प्रशासन के आदेश को खुली चुनौती, उग्र आंदोलन की चेतावनी

रीवा।जिले में 4-लेन निर्माण कार्य कर रही KCC Company पर गंभीर आरोपों का तूफान खड़ा हो गया है। मामला बीहर नदी पुल का है जहां पुल में आई खतरनाक दरार और 3 से 4 इंच तक हुए धंसाव के बाद प्रशासन ने भारी वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध लगा दिया था। लेकिन जमीनी हकीकत इस आदेश को ठेंगा दिखाती नजर आ रही है।

स्थानीय लोगों और वाहन चालकों का आरोप है कि जहां आम जनता को डायवर्सन रूट का पालन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है वहीं KCC कंपनी अपने भारी-भरकम ट्रक और डंपर को उसी जर्जर पुल से लगातार गुजार रही है। इससे न केवल प्रशासनिक आदेशों की धज्जियां उड़ रही हैं बल्कि हजारों लोगों की जान भी खतरे में पड़ रही है।

बताया जा रहा है कि पुल के गर्डर में दरार और पियर कैप क्षतिग्रस्त होने के बाद कलेक्टर द्वारा स्पष्ट निर्देश जारी किए गए थे कि कोई भी भारी वाहन इस मार्ग से नहीं गुजरेगा। इस आदेश को लागू कराने के लिए पुलिस राजस्व विभाग और MP Road Development Corporation (MPRDC) को जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

इसके बावजूद आरोप है कि KCC कंपनी न केवल अपने वाहनों को पुल से निकाल रही है बल्कि निर्माण सामग्री की ढुलाई और सफाई कार्य भी इसी पुल के जरिए कर रही है। इससे पहले से कमजोर पुल पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है जो किसी भी समय बड़े हादसे को जन्म दे सकता है।

चौंकाने वाली बात यह भी सामने आई है कि कई बार कंपनी के नाम का इस्तेमाल कर अन्य वाहन भी बिना रोक-टोक पुल पार कर जाते हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या कहीं न कहीं नियमों के पालन में ढिलाई या मिलीभगत तो नहीं हो रही?

गुस्साए स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यह दोहरा मापदंड है एक तरफ आम लोगों को रोका जा रहा है और दूसरी तरफ कंपनी को खुली छूट दी जा रही है। क्या कलेक्टर का आदेश सिर्फ जनता के लिए है? यह सवाल अब हर किसी की जुबान पर है।

इस पूरे मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। वाहन चालकों और स्थानीय लोगों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर KCC कंपनी के वाहनों का इस पुल से आवागमन तुरंत नहीं रोका गया तो वे उग्र आंदोलन करेंगे। उनका कहना है कि यह सिर्फ नियमों का उल्लंघन नहीं बल्कि लोगों की जिंदगी के साथ सीधा खिलवाड़ है।

गौरतलब है कि यह पुल पहले ही बेहद जर्जर हो चुका है और विशेषज्ञ भी इसे खतरनाक मान चुके हैं। ऐसे में भारी वाहनों का लगातार गुजरना किसी भी समय बड़े हादसे को न्योता देने जैसा है।

फिलहाल यह मामला प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी KCC कंपनी पर सख्त कार्रवाई करते हैं या फिर नियमों की यह खुली अनदेखी यूं ही जारी रहती है। अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो यह मुद्दा बड़ा जनआंदोलन बन सकता है।

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