रीवा में मौत का पुल! दरका बीहर नदी पुल, 4 इंच धंसा न डायवर्सन, न सुरक्षा; KCC कंपनी पर लीपापोती के आरोप

रीवा। रतहरा से चौरहटा तक जाने वाले मुख्य मार्ग पर स्थित बीहर नदी पुल अब लोगों के लिए जानलेवा साबित हो रहा है। पुल में आई खतरनाक दरारें और करीब 3 से 4 इंच तक का धंसाव इस बात का संकेत दे रहे हैं कि यहां कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। इसके बावजूद सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि अब तक न तो प्रशासन ने कोई ठोस कदम उठाया है और न ही लोगों के लिए डायवर्सन (वैकल्पिक मार्ग) की व्यवस्था की गई है।
यह पुल न केवल स्थानीय ग्रामीणों बल्कि अंतरराज्यीय यातायात के लिए भी बेहद अहम है। रोजाना उत्तर प्रदेश बिहार और महाराष्ट्र से आने-जाने वाले भारी वाहन इसी पुल से गुजरते हैं। ट्रकों और बसों का लगातार दबाव इस जर्जर पुल की हालत को और खराब कर रहा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पुल की स्थिति लंबे समय से खराब थी लेकिन हाल ही में इसमें आई दरार और धंसाव ने खतरे को कई गुना बढ़ा दिया है। पुल के एक हिस्से में साफ झुकाव नजर आता है और वाहन गुजरते समय तेज झटका महसूस होता है। कई बार छोटे-मोटे हादसे भी हो चुके हैं लेकिन प्रशासन अब भी आंखें मूंदे बैठा है।
सबसे गंभीर लापरवाही यह है कि इतनी खतरनाक स्थिति के बावजूद यहां कोई डायवर्सन तक नहीं बनाया गया है। अगर अचानक पुल का कोई हिस्सा टूटता है या और अधिक धंस जाता है तो वाहन सीधे नीचे गिर सकते हैं जिससे भारी जनहानि हो सकती है। पुल के नीचे गहराई होने के कारण हादसा और भी भयावह रूप ले सकता है।
इस पूरे मामले में 4-लेन सड़क निर्माण का कार्य कर रही KCC Company की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। आरोप है कि कंपनी एक तरफ नया पुल बना रही है जबकि दूसरी तरफ पुराने जर्जर पुल के ऊपर ही सड़क डालकर काम पूरा करने की कोशिश कर रही है। यानी एक लेन नया और सुरक्षित, जबकि दूसरी लेन पुराने कमजोर ढांचे पर आधारित यह स्थिति भविष्य में और बड़े खतरे को जन्म दे सकती है।
स्थानीय नागरिकों में इस मुद्दे को लेकर भारी आक्रोश है। अब लोग प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांगों में पुल की तकनीकी जांच डायवर्सन की तत्काल व्यवस्था भारी वाहनों पर रोक और पूरे पुल का नए सिरे से निर्माण शामिल है।
फिलहाल हालात बेहद चिंताजनक हैं और हर दिन हजारों लोग अपनी जान जोखिम में डालकर इस मौत के पुल से गुजरने को मजबूर हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन समय रहते चेतता है या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही कार्रवाई होती है।





