दिन में बंद, रात में चालू! बीहर नदी पुल पर प्रशासन की सख्ती फेल मौत के साए में दौड़ता ट्रैफिक

रीवा। रतहरा से चोरहटा मार्ग पर स्थित बीहर नदी पुल एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है। जिस पुल को दिन में सुरक्षा कारणों से बंद किया गया वही रात होते-होते फिर से वाहनों के लिए खुल गया। नतीजा लोग एक बार फिर अपनी जान जोखिम में डालकर उसी खतरनाक रास्ते से गुजरने को मजबूर हैं।
जानकारी के अनुसार पुल में आई गहरी दरारों और करीब 3 से 4 इंच तक हुए धंसाव के चलते जिला प्रशासन ने इसे गंभीर खतरा मानते हुए मार्ग को बंद करने का निर्णय लिया था। कलेक्टर के निर्देश पर पुलिस प्रशासन और MP Road Development Corporation (MPRDC) ने संयुक्त रूप से कार्रवाई करते हुए दिन के समय बैरिकेडिंग लगाकर यातायात रोक दिया था। साथ ही वैकल्पिक मार्ग (डायवर्सन) भी निर्धारित किए गए थे।
लेकिन यह सख्ती केवल कागजों तक सीमित रह गई। जैसे ही शाम ढली और रात हुई पुल पर दोबारा वाहनों की आवाजाही शुरू हो गई। बैरिकेडिंग या तो हटा दी गई या बेअसर हो गई और देखते ही देखते दोपहिया से लेकर भारी वाहन उसी जर्जर पुल से गुजरने लगे।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दिन में प्रशासन सख्ती दिखाता है लेकिन रात में न तो पुलिस की मौजूदगी रहती है और न ही कोई निगरानी। ऐसे में लोग मजबूरी या जल्दबाजी में नियमों की अनदेखी कर इस खतरनाक पुल से गुजरते हैं। यह स्थिति न केवल प्रशासन की कमजोरी को उजागर करती है बल्कि लोगों की सुरक्षा के प्रति गंभीर लापरवाही भी दर्शाती है।
गौरतलब है कि पुल पहले ही बेहद कमजोर स्थिति में है। इसमें आई दरारें और धंसाव यह साफ संकेत दे रहे हैं कि यह कभी भी बड़ा हादसा बन सकता है। ऐसे में रात के अंधेरे में जब दृश्यता कम होती है इस पुल से गुजरना और भी ज्यादा खतरनाक हो जाता है। एक छोटी सी चूक भी जानलेवा साबित हो सकती है।
नागरिकों ने प्रशासन की इस दोहरी व्यवस्था पर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि अगर मार्ग को बंद किया गया है तो उसे पूरी तरह से बंद रखा जाना चाहिए। केवल आदेश जारी कर देना और जमीन पर उसका पालन न कर पाना लोगों की जान के साथ खिलवाड़ है।
लोगों ने मांग की है कि पुल के दोनों ओर मजबूत और स्थायी बैरिकेडिंग की जाए रात में भी पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की जाए और नियम तोड़ने वालों पर कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही, जब तक पुल को पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं किया जाता तब तक किसी भी स्थिति में वहां से आवागमन की अनुमति न दी जाए।
फिलहाल दिन में बंद और रात में चालू रहने वाली यह स्थिति प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। अब देखना यह है कि जिम्मेदार अधिकारी इस लापरवाही को कब तक नजरअंदाज करते हैं, या फिर किसी बड़े हादसे के बाद ही सख्त कदम उठाए जाएंगे।





