मध्य प्रदेशरीवा

Rewa में होली कलेक्शन पर बड़ा खुलासा,शराब मांगने पहुंचे कथित यूट्यूबरों का वीडियो बना सबूत थाना प्रभारी की फटकार से मचा हड़कंप

रीवा। होली से ठीक पहले जिले में सामने आए कथित होली कलेक्शन प्रकरण ने प्रशासनिक गलियारों से लेकर पत्रकारिता जगत तक हलचल तेज कर दी है। आरोप है कि कुछ स्वयंभू यूट्यूबर और कथित पत्रकार त्योहार के नाम पर अलग अलग थानों के चक्कर लगाते हुए शराब की मांग कर रहे थे। मामला उस समय नया मोड़ लेता दिखा जब कुछ थाना प्रभारियों ने पूरी गतिविधि का वीडियो रिकॉर्ड कर उसे सबूत के तौर पर सुरक्षित रख लिया।

सूत्रों के अनुसार संबंधित लोग खुद को मीडिया से जुड़ा बताते हुए थाना परिसरों में पहुंचे। बताया जा रहा है कि उन्होंने होली मिलन और त्योहार की व्यवस्था का हवाला देकर शराब की मांग की। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक कुछ स्थानों पर कथित तौर पर झोले में शराब देते हुए दृश्य भी कैमरे में कैद किए गए। हालांकि इन वीडियो की आधिकारिक पुष्टि अभी शेष है और पुलिस प्रशासन की ओर से कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है।


पुलिस सूत्रों का कहना है कि रिकॉर्डिंग एहतियातन की गई। अधिकारियों को आशंका थी कि भविष्य में किसी प्रकार का दबाव ब्लैकमेल या मनगढ़ंत आरोप लगाया जा सकता है। ऐसे में तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट रखने के लिए वीडियो साक्ष्य सुरक्षित रखना जरूरी समझा गया। अब तक किसी भी थाने में इस संबंध में औपचारिक शिकायत दर्ज होने की पुष्टि नहीं हुई है लेकिन अंदरखाने चर्चा तेज है।

इसी बीच शहर के एक थाना प्रभारी द्वारा एक कथित यूट्यूबर को लगाई गई सख्त फटकार भी चर्चा का विषय बन गई है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार थाना प्रभारी ने तीखे शब्दों में कहा पत्रकार बताते हो शर्म नहीं आती? क्या थाना प्रभारी ने दारू की दुकान खोल रखी है? यहां से निकलो… भाग जाओ नहीं तो अभी मामला कायम कर दूंगा। तुम लोग जैसे यूट्यूबर-पत्रकार पूरी मीडिया को बदनाम कर रहे हो। दोबारा थाने के आसपास भी मत भटकना।

हालांकि इस कथित बातचीत का कोई आधिकारिक वीडियो सार्वजनिक नहीं हुआ है लेकिन शहर में यह घटनाक्रम तेजी से सुर्खियों में है। जानकारों का कहना है कि यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह पत्रकारिता की साख पर गंभीर आघात है।

गौरतलब है कि रीवा पुलिस द्वारा समय-समय पर नशे से दूरी है जरूरी जैसे अभियानों के माध्यम से नशे के खिलाफ जागरूकता चलाई जाती रही है। अवैध शराब और नशे के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए लगातार कार्रवाई की जाती है। ऐसे में यदि कुछ लोग कथित रूप से मीडिया पहचान का उपयोग कर शराब की मांग या उगाही का प्रयास करते हैं तो यह न केवल कानून व्यवस्था के प्रयासों को कमजोर करता है बल्कि पूरे मीडिया जगत को कटघरे में खड़ा कर देता है।

बुद्धिजीवियों का कहना है कि वास्तविक पत्रकारिता समाज के मुद्दों को उठाने का माध्यम है न कि निजी लाभ का साधन। उनका मानना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके और यदि कोई दोषी है तो उस पर कड़ी कार्रवाई हो।

होली जैसे पावन पर्व से पहले सामने आया यह प्रकरण कई सवाल खड़े कर गया है क्या त्योहार के नाम पर वाकई कलेक्शन का खेल चल रहा था या फिर मामला किसी गलतफहमी का परिणाम है?

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