MPRRDA में 18.59 करोड़ का डामर घोटाला उजागर: रीवा-मऊगंज में बड़ा खेल, 44 अफसर-ठेकेदारों पर FIR

रीवा। मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास निगम (MPRRDA) की परियोजना इकाइयों रीवा और मऊगंज में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत हुए सड़क निर्माण कार्यों में 18.59 करोड़ रुपये के बड़े डामर घोटाले का खुलासा हुआ है। इस बहुचर्चित मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) रीवा ने बड़ी कार्रवाई करते हुए 44 अधिकारियों कर्मचारियों और ठेकेदारों के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज प्रकरण में भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 467, 468, 471 के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 7सी के तहत अलग-अलग अपराध पंजीबद्ध किए गए हैं। यह कार्रवाई महालेखाकार (CAG) की ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर की गई है जिसमें वर्ष 2017 से 2021 के बीच प्रदेशभर में डामर खरीदी में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं का खुलासा हुआ था।
फर्जी इनवॉइस से करोड़ों की हेराफेरी
जांच में सामने आया कि ठेकेदारों और अधिकारियों की मिलीभगत से डामर खरीदी के नाम पर फर्जी इनवॉइस तैयार किए गए। नियमों के अनुसार डामर की खरीदी इंडियन ऑयल जैसी अधिकृत पेट्रोलियम कंपनियों से होनी थी लेकिन कागजों में दिखाए गए डामर की आपूर्ति वास्तव में कभी साइट तक पहुंची ही नहीं। एक ही इनवॉइस का कई बार उपयोग कर करोड़ों रुपये का भुगतान निकाल लिया गया।
ईओडब्ल्यू के अनुसार रीवा जिले में 12 करोड़ 71 लाख 6 हजार 372 रुपये और मऊगंज में 5 करोड़ 88 लाख 26 हजार 713 रुपये की वित्तीय अनियमितता की गई। यह पूरा खेल योजनाबद्ध तरीके से कूटरचना और धोखाधड़ी के जरिए अंजाम दिया गया।
44 आरोपी, कई बड़े नाम शामिल
रीवा जिले में 27 और मऊगंज में 17 आरोपियों को नामजद किया गया है। इनमें तत्कालीन महाप्रबंधक, सहायक प्रबंधक, उपयंत्री और कई बड़े ठेकेदार शामिल हैं। प्रमुख आरोपियों में राजीव कुमार दवे, कैलाश कुमार सोनी, जुगल किशोर गुप्ता, रामकुमार तिवारी, मोहम्मद शाहनवाज, प्रकाश त्रिपाठी सहित कई अधिकारी-कर्मचारी और निर्माण कंपनियों के संचालक शामिल हैं।
CAG रिपोर्ट में पहले ही हुआ था खुलासा
महालेखाकार की ऑडिट रिपोर्ट में रीवा जिले के पीआईयू-1 और पीआईयू-2 के कई पैकेजों में संदिग्ध चालानों के जरिए भुगतान का उल्लेख किया गया था। पीआईयू-1 में 105 संदिग्ध चालानों के माध्यम से 9.03 करोड़ रुपये और पीआईयू-2 में 65 चालानों के जरिए 5.21 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
इन कार्यों में कई निर्माण कंपनियों और ठेकेदारों के नाम सामने आए हैं जिनमें शांति कंस्ट्रक्शन, एमपी बिल्डर्स, शिवशक्ति कंस्ट्रक्शन, मैहर सीमेंट पाइप, बानको कंस्ट्रक्शन सहित अन्य शामिल हैं।
पहले हुई लीपापोती, अब सख्ती
इस घोटाले को लेकर पहले भी विधानसभा और पीएमओ स्तर तक शिकायतें पहुंची थीं लेकिन उस समय विभागीय स्तर पर मामले को दबाने और लीपापोती करने के आरोप लगे थे। ठेकेदारों को केवल नोटिस देकर जवाब ले लिया गया और कार्रवाई ठंडे बस्ते में डाल दी गई।
हालांकि अब ईओडब्ल्यू की सख्त कार्रवाई से पूरे मामले में हड़कंप मच गया है। जांच एजेंसी का कहना है कि सभी आरोपियों की भूमिका की गहराई से जांच की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
सड़क निर्माण की गुणवत्ता पर भी सवाल
इस घोटाले के सामने आने के बाद प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनी सड़कों की गुणवत्ता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बिना वास्तविक डामर उपयोग के बनी सड़कों की मजबूती और टिकाऊपन पर अब जांच की तलवार लटक रही है।
यह मामला न केवल प्रशासनिक भ्रष्टाचार का बड़ा उदाहरण है बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस तरह योजनाओं के नाम पर जनता के पैसे का दुरुपयोग किया गया। अब देखना होगा कि जांच किस हद तक पहुंचती है और दोषियों को क्या सजा मिलती है।






