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डिजिटल पुलिसिंग की ओर बड़ा कदम: e-Office से बढ़ेगी पारदर्शिता, त्वरित निर्णय और जवाबदेही  डीजीपी कैलाश मकवाणा

Media Auditor.मध्यप्रदेश पुलिस अब पूरी तरह डिजिटल कार्यप्रणाली की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही है। इसी क्रम में पुलिस मुख्यालय भोपाल में e-Office प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर एक महत्वपूर्ण ऑनलाइन प्रशिक्षण सत्र आयोजित किया गया। इस पहल का उद्देश्य विभागीय कार्यों में पारदर्शिता त्वरित निर्णय क्षमता और जवाबदेही को और अधिक मजबूत बनाना है।

इस प्रशिक्षण सत्र में प्रदेशभर के पुलिस आयुक्त (इंदौर, भोपाल), सभी जिलों के पुलिस अधीक्षक, रेल पुलिस अधीक्षक (भोपाल, इंदौर, जबलपुर) प्रशिक्षण संस्थानों के अधिकारी एवं विभिन्न इकाइयों के सेनानी ऑनलाइन जुड़े। वहीं पुलिस मुख्यालय स्तर से वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे, जिन्होंने डिजिटल सिस्टम के महत्व और उसके उपयोग पर विस्तार से मार्गदर्शन दिया।

इस दौरान कैलाश मकवाणा ने स्पष्ट कहा कि e-Office प्रणाली पुलिस कार्यप्रणाली में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी। उन्होंने कहा कि इससे फाइलों के निपटान में तेजी आएगी अनावश्यक देरी समाप्त होगी और हर स्तर पर कार्यों की निगरानी संभव हो सकेगी। उन्होंने सभी इकाइयों को निर्देशित किया कि e-Office का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित किया जाए ताकि पुलिसिंग और अधिक प्रभावी और जवाबदेह बन सके।

बैठक में डीजीपी ने हाल ही में सम्पन्न नवरात्रि पर्व के दौरान पुलिस द्वारा किए गए उत्कृष्ट प्रबंधन की सराहना भी की। साथ ही आगामी हनुमान जयंती के मद्देनजर विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे स्वयं फील्ड में जाकर भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों विशेषकर धार्मिक स्थलों का निरीक्षण करें और सुरक्षा व्यवस्थाओं का जायजा लें।

भीड़ प्रबंधन को लेकर उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि एंट्री और एग्जिट मार्ग अलग-अलग रखे जाएं क्रॉस मूवमेंट पूरी तरह रोका जाए सीसीटीवी मॉनिटरिंग मजबूत की जाए और बैरिकेडिंग व्यवस्था सुदृढ़ हो। इसके साथ ही सेक्टर आधारित प्लानिंग लागू करने और वीआईपी मूवमेंट के दौरान आम जनता की आवाजाही प्रभावित न हो इस पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई।

प्रशिक्षण सत्र में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एससीआरबी) ने बताया कि पुलिस मुख्यालय स्तर पर e-Office का 100 प्रतिशत उपयोग पहले ही सुनिश्चित किया जा चुका है और अब इसे चरणबद्ध तरीके से प्रदेश के सभी कार्यालयों में लागू किया जा रहा है। उन्होंने इसे भविष्य की अनिवार्य आवश्यकता बताते हुए सभी अधिकारियों से इसे प्राथमिकता के साथ अपनाने का आह्वान किया।

एनआईसी के विशेषज्ञों द्वारा e-Office के विभिन्न मॉड्यूल्स जैसे फाइल प्रबंधन, नोटशीट, पत्राचार और अनुमोदन प्रक्रिया पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया गया। साथ ही अधिकारियों की जिज्ञासाओं का समाधान कर उन्हें तकनीकी रूप से सक्षम बनाया गया।

बैठक में ई-विवेचना (e-Vivechana) ऐप पर भी चर्चा की गई जिसके माध्यम से विवेचक टैबलेट पर ही संपूर्ण अनुसंधान कार्य कर सकेंगे। इसके अलावा ई-साक्ष्य ऐप के जरिए घटनास्थल की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी, संदेश ऐप से मॉनिटरिंग और लंबित चालानों के डिजिटाइजेशन के निर्देश भी दिए गए।

इसके साथ ही Measurement Collection Unit (MCU) के महत्व पर प्रकाश डाला गया। इस यूनिट के माध्यम से अपराधियों के बायोमेट्रिक डेटा जैसे फिंगरप्रिंट, आईरिस स्कैन, डीएनए सैंपल और फोटो एकत्र कर उनका वैज्ञानिक विश्लेषण किया जाएगा जिससे अपराधियों की पहचान और ट्रैकिंग प्रक्रिया और अधिक सटीक एवं आधुनिक बनेगी।

कुल मिलाकर मध्यप्रदेश पुलिस का यह डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन अभियान आने वाले समय में पुलिसिंग को नई दिशा देने वाला साबित होगा जहां तकनीक के सहारे तेज पारदर्शी और जवाबदेह व्यवस्था स्थापित की जा रही है।

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