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मैहर में गूंज रहा तंज: साहब, कहां नहीं मिलती शराब? प्रतिबंधित वार्ड 1 में खुलेआम पैकारी के आरोप, क्या रीवा रेंज की सख्ती सिर्फ कागज़ों में?

मैहर। धार्मिक नगरी मैहर में शराबबंदी को लेकर हालात विस्फोटक होते जा रहे हैं। एक तरफ सरकार और रीवा रेंज के अधिकारी अवैध शराब के खिलाफ सख्त अभियान चलाने का दावा कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ प्रतिबंधित क्षेत्रों में खुलेआम शराब बिकने और परोसे जाने के आरोप सामने आ रहे हैं। सवाल अब सीधे रीवा रेंज की कार्यप्रणाली और उसके अधिकारियों के मार्गदर्शन में हो रही कार्रवाई पर उठने लगे हैं।

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश सरकार ने 1 अप्रैल 2025 से धार्मिक नगरों में पूर्ण शराबबंदी लागू की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि मैहर सहित पवित्र स्थलों में न तो ठेके चलेंगे और न बार। इसके बावजूद जमीनी हकीकत कुछ और कहानी बयां कर रही है।

वार्ड 1 बना अवैध कारोबार का अड्डा?

स्थानीय सूत्रों के मुताबिक वार्ड क्रमांक 1 में कथित तौर पर त्रिपाठी नाम से पहचाने जाने वाले व्यक्ति का नाम शराब बिक्री में चर्चा में है। इसी क्षेत्र में चौधरी नाम की एक महिला और एक अन्य महिला पर भी पैकारी के आरोप लगाए जा रहे हैं। अंधरा टोला वार्ड नंबर 1 जहां मंदिर स्थित है वहां भी देर रात तक सुरापान की शिकायतें मिल रही हैं।

हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार मिल रही शिकायतों ने रीवा रेंज की निगरानी व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

रीवा रेंज के अधिकारियों के मार्गदर्शन में कार्रवाई… असर कहां?

रीवा रेंज के वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में संयुक्त दबिश और चेकिंग अभियान चलाए जाने की बात कही जा रही है। समय-समय पर सख्ती के दावे भी सामने आते हैं। लेकिन स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इन अभियानों का असर स्थायी रूप से दिखाई नहीं देता। छोटे स्तर पर पकड़-धकड़ कर कार्रवाई दर्शा दी जाती है जबकि कथित मुख्य सप्लायरों और नेटवर्क तक हाथ नहीं पहुंचता।

महिलाओं का कहना है कि शराबबंदी के बाद उन्हें उम्मीद थी कि परिवारों में शांति लौटेगी लेकिन धंधा बंद नहीं हुआ बस तरीका बदल गया। यह कथन अब जनचर्चा का हिस्सा बन चुका है।

संरक्षण या लापरवाही?

यदि प्रतिबंधित क्षेत्र में शराब आसानी से उपलब्ध है तो यह केवल सामान्य लापरवाही नहीं मानी जा सकती। सवाल उठता है क्या निगरानी में कमी है या फिर जमीनी स्तर पर आदेशों का पालन नहीं हो पा रहा? रीवा रेंज के अधिकारियों के मार्गदर्शन में चल रहे अभियानों की प्रभावशीलता अब कठघरे में है।

धार्मिक आस्था सरकार के निर्देश और पुलिस के दावों के बीच अब मैहर की सड़कों पर एक ही सवाल गूंज रहा है क्या शराबबंदी सिर्फ घोषणा थी या उसे सख्ती से लागू करने की इच्छाशक्ति भी दिखाई देगी?
मां शारदा की नगरी में अब जवाबदेही तय होने का वक्त है। रीवा रेंज क्या जमीनी सख्ती दिखाएगी या फिर दावे ही गूंजते रहेंगे?

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