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होली पर मोबाइल गैंग का धावा! कैमरा ऑन… दबाव शुरू, कथित यूट्यूबर-पत्रकारों की शराब वसूली से रीवा में हड़कंप

Rewa.होली की आहट के साथ शहर में जहां रंग और अबीर की खुशबू घुलनी चाहिए वहीं इस बार चर्चाओं का रंग कुछ और ही नजर आ रहा है। बाजारों और दफ्तरों के गलियारों में एक कथित मोबाइल गैंग की सक्रियता को लेकर फुसफुसाहट तेज है। आरोप है कि कुछ स्वयंभू यूट्यूबर और कथित पत्रकार त्योहार को अवसर में बदलते हुए शराब और अन्य इंतजाम की मांग कर रहे हैं। हाथ में मोबाइल कैमरा गले में प्रेस कार्ड और कंधे पर झोला और फिर शुरू होता है कवरेज सम्मान और सहयोग की बातों का सिलसिला।

स्थानीय व्यापारियों का दावा है कि जैसे जैसे होली नजदीक आती है यह समूह एक्टिव मोड में आ जाता है। दिन में पहचान और शुभकामनाएं रात में व्यवस्था की चर्चा ऐसे आरोप कई इलाकों से सामने आ रहे हैं। कुछ दुकानदारों का कहना है कि यदि मांग पूरी न हो तो नकारात्मक खबर चलाने या सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल करने की धमकी दी जाती है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है लेकिन शहर के कई व्यापारिक क्षेत्रों में यही चर्चा गर्म है।

शराब दुकानों से जुड़े कुछ लोगों का कहना है कि त्योहार के समय बिक्री स्वाभाविक रूप से बढ़ती है। ऐसे में यदि अनौपचारिक दबाव भी जुड़ जाए तो स्थिति असहज हो जाती है। त्योहार पर माहौल खराब न हो इसलिए कई लोग चुप्पी साध लेते हैं एक व्यापारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा। उनका तर्क है कि खुलकर विरोध करने पर भविष्य में अनावश्यक विवाद या लक्षित खबरों का खतरा बना रहता है।

सूत्रों के मुताबिक यह हलचल सिर्फ बाजारों तक सीमित नहीं है। थानों और आबकारी विभाग के आसपास भी कथित रूप से कुछ चेहरे सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। आरोप है कि त्योहारी बधाई के बहाने पहुंचकर सहयोग की अपेक्षा जताई जाती है। यदि इन आरोपों में सच्चाई है तो यह न केवल व्यापारियों के लिए परेशानी का कारण है बल्कि व्यवस्था और पत्रकारिता दोनों की साख पर सवाल खड़ा करता है।

जिम्मेदार नागरिकों और बुद्धिजीवियों का कहना है कि असली पत्रकारिता जनहित तथ्यों और जवाबदेही पर आधारित होती है। मीडिया की पहचान का दुरुपयोग कर किसी भी प्रकार का दबाव बनाना पूरे पेशे को बदनाम करता है। उनका मानना है कि पंजीयन और प्रेस पहचान पत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया को कड़ा किया जाना चाहिए ताकि वास्तविक और फर्जी प्रतिनिधियों के बीच स्पष्ट अंतर हो सके।

सोशल मीडिया पर भी त्योहारी वसूली और मोबाइल गैंग जैसे शब्दों के साथ पोस्ट और वीडियो तेजी से साझा किए जा रहे हैं। इन पोस्टों में कैमरा ऑन होते ही दबाव बढ़ने के आरोप लगाए जा रहे हैं। हालांकि प्रशासन की ओर से अब तक किसी आधिकारिक पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि लिखित शिकायत मिलने पर जांच संभव है और आवश्यक होने पर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

गौरतलब है कि शासन स्तर पर अवैध वसूली और दबाव बनाने जैसी गतिविधियों पर सख्ती के निर्देश पहले से हैं। ऐसे में यदि त्योहार के नाम पर कोई भी अनौपचारिक मांग या दबाव बनाया जा रहा है तो यह गंभीर विषय माना जाएगा। कानून व्यवस्था बनाए रखना और त्योहार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना प्रशासन की प्राथमिकता है।

सवाल यह भी है कि क्या कथित पीड़ित खुलकर सामने आएंगे? त्योहार के समय टकराव से बचने की मानसिकता भविष्य की आशंकाएं और सामाजिक संबंध ये सभी कारण शिकायत दर्ज कराने में बाधा बनते हैं। इसी चुप्पी के बीच चर्चाएं और अफवाहें भी तेज हो जाती हैं।

होली भाईचारे उल्लास और रंगों का त्योहार है। लेकिन इस बार रीवा में रंगों के साथ रंगदारी की चर्चाएं भी तैर रही हैं।

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