गाजा तस्करी मामले में वरिष्ठ अधिकारी पर कथित दबाव के आरोप जांच की निष्पक्षता पर उठे गंभीर सवाल

रीवा. जिले में गाजा तस्करी से जुड़े एक संवेदनशील मामले ने पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। नशा मुक्ति अभियान को लेकर कड़े कदम उठाने का दावा करने वाली रेंज की पुलिस अब खुद विवादों के घेरे में है। आरोप है कि रेंज के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गाजा तस्करी के मामले में एक आरोपी को बचाने के लिए थाना प्रभारी पर दबाव डाला। जैसे ही यह जानकारी सामने आई, प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया और मामला चर्चा का प्रमुख विषय बन गया है।
सूत्रों के अनुसार, हाल ही में जिले के एक थाना क्षेत्र में पुलिस ने दो लोगों को गाजा तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया था। प्रारंभिक जांच के दौरान थाना प्रभारी को दोनों आरोपियों के खिलाफ ऐसे कथित प्रमाण मिले थे, जिनसे उनकी संलिप्तता स्पष्ट मानी जा रही थी। बताया जाता है कि गिरफ्तार आरोपियों में से एक लंबे समय से सक्रिय गाजा आपूर्ति नेटवर्क से जुड़ा हुआ माना जाता रहा है।
मीडिया कर्मी के सामने आया कथित दबाव:- मामला तब और गंभीर हो गया जब एक मीडिया कर्मी के सामने यह दावा सामने आया कि रेंज के वरिष्ठ अधिकारी ने थाना प्रभारी को “एक आरोपी का नाम अभियोग से हटाने” के मौखिक निर्देश दिए। इस दावे के सामने आते ही विभागीय हलकों में हलचल और तेज हो गई। सूत्र बताते हैं कि इस कथित हस्तक्षेप के बाद जांच की दिशा प्रभावित होती दिखी, जिससे निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
कुछ सूत्र यह भी बताते हैं कि संबंधित वरिष्ठ अधिकारी के कुछ व्यक्तियों से पुराने संबंध रहे हैं, जिन पर पहले भी अवैध कारोबारी नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप चर्चा में रहे हैं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
पहले भी सामने आ चुके हैं दबाव के आरोप:-मिली जानकारी के अनुसार यह पहला अवसर नहीं है जब इस प्रकार का आरोप सामने आया हो। बताया जाता है कि कुछ समय पूर्व उसी रेंज के एक अन्य थाना प्रभारी पर भी कथित तौर पर दबाव डाला गया था कि “ तस्कर को किसी तरह मैनेज कर बचा लिया जाए।” हालांकि उस समय संबंधित थाना प्रभारी ने किसी भी प्रकार के दबाव को स्वीकार करने से इनकार करते हुए आरोपी के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की थी। इस पुराने मामले के फिर से चर्चा में आने से वर्तमान विवाद और जटिल हो गया है।
थाना प्रभारी व पुलिस स्टाफ में नाराज़गी:- वर्तमान मामले में थाना प्रभारी का कहना है कि कार्रवाई के दौरान मिले तथ्यों के आधार पर किसी आरोपी को बचाना न तो उचित है और न ही पेशेवर दृष्टि से स्वीकार्य। पुलिस स्टाफ में भी इस प्रकरण को लेकर असंतोष बताया जा रहा है। कई कर्मियों ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि यदि जांच पर इस प्रकार का बाहरी दबाव पड़ता है तो इससे न केवल कानूनी प्रक्रिया कमजोर होगी बल्कि नशामुक्ति अभियान की विश्वसनीयता भी प्रभावित होगी। पुलिसकर्मियों के अनुसार, ऐसी घटनाएँ मनोबल पर भी नकारात्मक असर डालती हैं।
सामाजिक संगठनों ने जताई गहरी चिंता :- स्थानीय सामाजिक संगठन और नशामुक्ति अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं ने इस मामले पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि यदि उच्च स्तर पर ही कथित संरक्षण के आरोप सामने आते हैं तो इससे आम जनता का विश्वास टूटता है और तस्करों को अप्रत्यक्ष रूप से साहस मिलता है। समाजसेवियों ने मांग की है कि पूरे मामले की पारदर्शी जांच होनी चाहिए ताकि तथ्यों के आधार पर कार्यवाही सुनिश्चित की जा सके।





