पोहरी की शर्मनाक घटना: बदहाल सड़क ने बना दिया जंगल में प्रसव का दर्दनाक कारणग्रामीणों में प्रशासन के खिलाफ उबाल, सड़क निर्माण की मांग फिर तेज

मीडिया ऑडीटर, शिवपुरी।
शिवपुरी जिले के पोहरी क्षेत्र में प्रशासनिक लापरवाही और बदहाल सड़कों की एक भयावह तस्वीर सामने आई है। यहां गड्ढों से भरी और कई जगहों पर पूरी तरह टूटी हुई सड़क पर अस्पताल जा रही एक गर्भवती महिला को लगातार झटके लगते रहे, जिसके कारण उसे अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। स्थिति इतनी विकट हो गई कि महिला को बीच जंगल के रास्ते में ही सड़क किनारे बच्ची को जन्म देना पड़ा। यह घटना न सिर्फ दर्दनाक है, बल्कि पोहरी क्षेत्र में व्यवस्था की पोल खोलने वाली भी है।
सूत्रों के अनुसार, गर्भवती महिला अपने परिजनों के साथ वाहन से पोहरी अस्पताल की ओर जा रही थी। परिवार का कहना है कि सड़क इतनी खराब थी कि वाहन हर कुछ मीटर पर गड्ढों में उछल रहा था। यही झटके महिला के लिए बेहद खतरनाक साबित हुए और अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई।
वे लोग अस्पताल तक पहुँचना तो चाहते थे, लेकिन खराब सड़क ने यात्रा को और धीमा कर दिया। महिला की स्थिति बिगड़ती चली गई और मजबूरी में वाहन को जंगल के बीच रोकना पड़ा। परिवार के साथ मौजूद दो महिलाओं ने बिना किसी चिकित्सीय उपकरण और सहायता के, साहस और समझदारी दिखाते हुए सड़क किनारे ही सुरक्षित प्रसव करवाया। महिला ने एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। राह से गुजर रहे लोगों ने भी घटना देख सहायता की, लेकिन दृश्य इतना असामान्य था कि मौके पर कुछ देर तक अफरा-तफरी जैसी स्थिति बनी रही।
इस घटना ने ग्रामीणों और स्थानीय निवासियों में गहरा रोष पैदा कर दिया है। लोगों ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह हादसा प्रशासनिक उदासीनता का परिणाम है। उनका आरोप है कि यह सड़क कई महीनों से अत्यंत दयनीय स्थिति में है। कई बार शिकायतें और मांगें की गईं, लेकिन न जनप्रतिनिधियों ने ध्यान दिया न ही विभागीय अधिकारियों ने। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि समय पर सड़क निर्माण या मरम्मत हो जाती तो गर्भवती महिला को इस तरह की जानलेवा परिस्थिति का सामना नहीं करना पड़ता।
इस बीच, घटना की जानकारी मिलते ही बीएमओ डॉ. दीक्षांत ने तुरंत सक्रियता दिखाते हुए एम्बुलेंस को मौके के लिए रवाना किया। प्रसव के बाद मां और नवजात बच्ची दोनों को सुरक्षित तरीके से पोहरी अस्पताल में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने बताया कि प्राथमिक उपचार के बाद दोनों की स्थिति पूरी तरह स्थिर है और खतरे से बाहर हैं।
ग्रामीणों ने अस्पताल प्रबंधन की तत्परता की सराहना की, लेकिन साथ ही सड़क की स्थिति को लेकर आक्रोश व्यक्त किया। उनका कहना है कि पोहरी क्षेत्र की अधिकांश सड़कें लंबे समय से बदहाल हैं और बारिश के बाद हालात और भी बिगड़ जाते हैं। कई गांव ऐसे हैं जहां से मरीजों को समय पर अस्पताल ले जाना भी संभव नहीं होता।
इस घटना के बाद ग्राम पंचायतों से लेकर स्थानीय संगठनों तक सभी ने सड़क निर्माण की मांग तेज कर दी है। ग्रामीण प्रतिनिधियों ने कहा कि इस शर्मनाक घटना को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और अब वे सामूहिक रूप से आंदोलन की तैयारी करेंगे, ताकि प्रशासन इस दिशा में जल्द कदम उठाए।
लोगों का यह भी कहना है कि किसी भी आधुनिक समाज में सड़क जैसी बुनियादी सुविधा की कमी के कारण किसी महिला को जंगल में बच्चे को जन्म देना पड़े, यह बेहद दुःखद और चिंता का विषय है। यदि प्रशासन अब भी जागरूक नहीं होता, तो भविष्य में ऐसी घटनाएं और भी गंभीर रूप ले सकती हैं।
फिलहाल मां-बेटी सुरक्षित हैं, लेकिन इस घटना ने पोहरी क्षेत्र की जमीनी सच्चाई सामने ला दी है—जहां सड़कें विकास के दावों को झूठा साबित कर रही हैं और आम जनता अपनी जान जोखिम में डालकर रोजमर्रा की जिंदगी जी रही है। ग्रामीणों का कहना है कि अब वे चुप नहीं बैठेंगे और सड़क निर्माण होने तक अपनी आवाज और बुलंद करेंगे।





