MP News: दोस्तों से बातचीत करते हुए रीवा में युवक को आया दिल का दौरा, CPR देने के बाद भी नहीं बची जान

MP News: कहते हैं कि मौत कभी चेतावनी नहीं देती, और ऐसा ही कुछ हुआ रीवा में। यहां 20 अक्टूबर को सिरमौर चौराहा स्थित एक दुकान में बैठे युवक को अचानक दिल का दौरा पड़ा और उसने मौके पर ही दम तोड़ दिया। घटना का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
दोस्तों के साथ बातचीत के दौरान युवक को आया दिल का दौरा
घटना 20 अक्टूबर की है जब प्रकाश सिंह बघेल (31) अपने दोस्तों के साथ सिरमौर चौराहा स्थित एक दुकान पर बैठकर हंसी-मजाक कर रहे थे। इसी बीच अचानक प्रकाश को सीने में तेज दर्द महसूस हुआ और वह अचानक नीचे गिर पड़े। घबराए हुए दोस्तों ने उसे उठाने और होश में लाने की कोशिश की। कुछ समय बाद उसे अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
वीडियो में देखा जा सकता है कि प्रकाश और चार अन्य लोग दुकान में मौजूद थे। अचानक सीने में दर्द होने के बाद वह गिर पड़े, और दोस्तों ने तुरंत CPR देने का प्रयास किया। हालांकि, उनकी हालत में कोई सुधार नहीं हुआ।
अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने किया मृत घोषित
प्रकाश को तुरंत अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसकी जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। इस घटना से परिवार सदमे में है और वे यह मानने के लिए तैयार नहीं हैं कि स्वस्थ अवस्था में घर से बाहर निकला प्रकाश अब उनके बीच नहीं है।
निर्दोष साबित हुई महिला ने 14 साल काटी सजा
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने एक अन्य मामले में एक महिला और उसकी जेठानी को निर्दोष करार दिया है। ये दोनों महिला 2010 में सत्र न्यायालय द्वारा अपने देवर की हत्या के मामले में आजीवन कारावास की सजा पाए जाने के बाद जेल में थीं। उच्च न्यायालय ने महिला को तुरंत रिहा करने का आदेश देते हुए कहा कि महिला के दो मासूम बच्चों के साथ जेल में रहना अनुचित था। अदालत ने पुलिस की जांच की कड़ी आलोचना की और संबंधित पुलिसकर्मियों और गवाहों के खिलाफ FIR दर्ज करने का भी आदेश दिया।
पुलिस की जांच पर उच्च न्यायालय की कठोर टिप्पणी
न्यायमूर्ति गुरपाल सिंह अहलूवालिया की एकल पीठ ने कहा कि पुलिस की मनमानी कार्रवाई किसी अपराध से कम नहीं है। खंडवा जिले की सरजू बाई और उसकी जेठानी भूरी बाई को सत्र न्यायालय ने 2010 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। मामला 21 सितंबर 2008 का है, जब सरजू बाई के देवर हरी उर्फ भग्गू का शव एक नीम के पेड़ से लटका हुआ मिला था। पुलिस ने सरजू और भूरी को आरोपित बनाकर यह दिखाया कि उनके आंगन में कीटनाशक की एक खाली बोतल मिली थी। पुलिस ने दावा किया कि हरी को पहले कीटनाशक पिलाया गया और फिर उसे फांसी पर लटका दिया गया।
उच्च न्यायालय का फैसला और निर्दोष की रिहाई का आदेश
सरजू और भूरी ने सत्र न्यायालय के फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की थी। उच्च न्यायालय ने यह कहा कि गांव में खेती-किसानी करने वाले लोगों के घर में कीटनाशक का होना सामान्य बात है। पुलिस ने मामले की जांच के दौरान केवल गवाहों के बयानों पर निर्भरता दिखाई। कोर्ट ने कहा कि गवाहों के प्रतिशोध में महिलाओं के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराया गया और संबंधित कोर्ट ने इन तथ्यों पर गौर नहीं किया।
उच्च न्यायालय ने महिला को रिहा करने के साथ ही गवाहों, मृतक की मां, दो बहनों, भाई, थाने के इंचार्ज और दो पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी केस दर्ज करने का आदेश दिया।
इस तरह की घटनाएं समाज और न्याय प्रणाली के लिए गंभीर मुद्दे हैं। जहाँ एक ओर युवक के अचानक दिल के दौरे से हुई मृत्यु ने लोगों को झकझोर कर रख दिया है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं के निर्दोष साबित होने के बावजूद 14 साल जेल में रहने का मामला न्यायिक तंत्र पर प्रश्नचिह्न लगाता है। न्यायालय ने जहां महिलाओं को रिहा कर उनका न्याय किया है, वहीं पुलिस और गवाहों के खिलाफ कार्रवाई का आदेश देकर एक मजबूत संदेश दिया है कि किसी के खिलाफ झूठे मामले बनाना अपराध के समान है।