
रीवा। पूरे देश के साथ-साथ रीवा जिले में भी इन दिनों वीडियो बनाओ विवर बढ़ाओ की होड़ तेज हो गई है। सरकारी विभागों से लेकर आम नागरिक तक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल तेजी से कर रहे हैं लेकिन इस बढ़ती सक्रियता के बीच एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है क्या यह डिजिटल सक्रियता लोगों को जागरूक कर रही है या फिर अनजाने में अफवाहों को बढ़ावा दे रही है?
दरअसल सोशल मीडिया पर लोकप्रिय होने की चाहत ने कई लोगों को ऐसी राह पर ला खड़ा किया है जहां सच्चाई से ज्यादा महत्व वायरल कंटेंट को दिया जा रहा है। कुछ लोग केवल लाइक शेयर और फॉलोअर्स बढ़ाने के लिए बिना पुष्टि के वीडियो और जानकारी पोस्ट कर रहे हैं। इसका सीधा असर समाज पर पड़ रहा है कहीं अफवाहें फैल रही हैं तो कहीं लोगों की गोपनीयता भंग हो रही है।
रीवा जिले में भी कई ऐसे मामले सामने आए हैं जहां बिना अनुमति के सरकारी कार्यालयों घटनास्थलों या व्यक्तिगत जीवन से जुड़े वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिए गए। इससे न केवल संबंधित व्यक्तियों की निजता प्रभावित हुई बल्कि कई बार गलत जानकारी के चलते प्रशासन को भी सफाई देनी पड़ी।
विशेषज्ञों का मानना है कि सोशल मीडिया एक सशक्त माध्यम है लेकिन इसका जिम्मेदारी से उपयोग बेहद जरूरी है। यदि इसका उपयोग सही तरीके से किया जाए तो यह जनजागरूकता का बड़ा हथियार बन सकता है लेकिन अगर इसका दुरुपयोग हो तो यह समाज में भ्रम और अविश्वास फैलाने का कारण भी बन सकता है।
इसी के विपरीत पंजीकृत समाचार पत्र और अधिकृत न्यूज चैनल आज भी अपनी जिम्मेदारी को प्राथमिकता देते हैं। वे किसी भी खबर को प्रकाशित करने से पहले उसकी पुष्टि करते हैं तथ्यों की जांच करते हैं और समाज के प्रति अपनी जवाबदेही निभाते हैं। यही कारण है कि विश्वसनीय पत्रकारिता आज भी लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बनाए हुए है।
मीडिया जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि आज के दौर में सबसे बड़ी चुनौती सच को बचाना है। जब हर व्यक्ति खुद को रिपोर्टर समझकर खबरें पोस्ट करने लगे तब असली पत्रकारिता की अहमियत और भी बढ़ जाती है। क्योंकि जहां सोशल मीडिया पर बिना जांच के जानकारी वायरल हो जाती है वहीं सच्ची खबरें कई बार भीड़ में दबकर रह जाती हैं।
रीवा में भी यह देखने को मिल रहा है कि कई महत्वपूर्ण और सत्य घटनाएं सोशल मीडिया की अफवाहों के बीच गुम हो जाती हैं। इससे आम जनता के बीच भ्रम की स्थिति बनती है और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठते हैं।
ऐसे में जरूरत है कि लोग सोशल मीडिया का उपयोग समझदारी से करें। बिना पुष्टि के किसी भी जानकारी को साझा करने से बचें और गोपनीयता का सम्मान करें। साथ ही विश्वसनीय स्रोतों से ही खबरों पर भरोसा करें।
कुल मिलाकर वीडियो बनाओ विवर बढ़ाओ की यह दौड़ अगर नियंत्रण में नहीं आई तो यह समाज के लिए गंभीर समस्या बन सकती है। लोकप्रियता की इस अंधी दौड़ में कहीं सच की आवाज दब न जाए यह हम सभी की जिम्मेदारी है।





